आज मैंने प्रकृति के ऊपर एक कविता लिखी.....
जो शांत खड़ा रहकर❟
चह-चहाती चिड़ियों को घर देता है
कौन है वो?
जो बूँद-बूँद इकट्ठी कर❟
अपना वजूद बनाती है
कैसी भी हो हालत धरा पर❟
यह निर्मल सी बहती है
हर पल कल-कल कर❟
मधुर संगीत सुनाती है
ये पेड़ और ये नदियाँ
देन हैं हमे प्रकृति की
मिलकर आज ये कसम खाते हैं
की सुरक्षा करेंगे पर्यावरण की
कौन है वो?
कौन है वो?
जो खुद धूप में खड़ा❟
दूसरों को छाया देता है
जो बिना कुछ माँगे❟
फल-फूल देता है
जो शांत खड़ा रहकर❟
चह-चहाती चिड़ियों को घर देता है
कौन है वो?
जो बूँद-बूँद इकट्ठी कर❟
अपना वजूद बनाती है
कैसी भी हो हालत धरा पर❟
यह निर्मल सी बहती है
हर पल कल-कल कर❟
मधुर संगीत सुनाती है
ये पेड़ और ये नदियाँ
देन हैं हमे प्रकृति की
मिलकर आज ये कसम खाते हैं
की सुरक्षा करेंगे पर्यावरण की
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